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दिवाली आने वाली है! अर्जुन नरम मिट्टी से एक छोटा-सा दीया बनाता है।
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दीया थोड़ा टेढ़ा है। अर्जुन उसे पीले और लाल रंग से रंगता है।
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दादी दरवाज़े पर रंगोली बनाती हैं। बिंदियाँ, लकीरें और एक बड़ा फूल।
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शाम को पूरी गली छोटे-छोटे दीयों से जगमगा उठती है।
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अर्जुन टेढ़ा दीया जलाता है। वह भी बाक़ी दीयों जैसा ही चमकता है!
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फिर आती हैं मिठाइयाँ: लड्डू, बर्फ़ी और जलेबी। शुभ दिवाली, अर्जुन!