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आज पोंगल है, फ़सल का त्योहार। परिवार बाहर मिट्टी की नई हांडी में खाना बनाता है।
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हांडी में दूध, चावल और गुड़ डाला जाता है। अर्जुन उसे उबलते हुए देखता है।
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बुद-बुद, बुद-बुद... यह ऊपर उठ रहा है! दूध ऊपर तक आ जाता है।
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सर्र! दूध बाहर उफ़न जाता है। सब ज़ोर से कहते हैं, “पोंगलो पोंगल!”
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जब हांडी उफ़नती है, तो इसका मतलब है कि साल ख़ुशियों भरा होगा और सबके लिए ख़ूब सारा खाना होगा।
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गायों को नहलाया जाता है और फूलों की मालाएँ पहनाई जाती हैं। अर्जुन उन्हें मीठा पोंगल भी खिलाता है।