पन्ना 1
दादी गरम-गरम रोटियाँ बनाती हैं। अर्जुन उन्हें गिनता है: एक, दो, तीन, चार।
पन्ना 2
अर्जुन फिर से गिनता है। एक, दो, तीन। चौथी रोटी कहाँ गई?
पन्ना 3
दीवार पर एक बिल्ली बैठी है। उसका मुँह पूरा भरा हुआ है।
पन्ना 4
“रुक जा, बिल्ली!” अर्जुन कहता है। बिल्ली भागती है। अर्जुन भागता है। दादी भी भागती हैं!
पन्ना 5
बिल्ली छत पर कूद जाती है। रोटी नीचे गिरती है, सीधे दादी के सिर पर!
पन्ना 6
दादी हँसती हैं। “अगली बार, बिल्ली, माँग लेना!” वे बिल्ली को थोड़ा-सा दूध देती हैं।