पन्ना 1
दादाजी कहते हैं, “मैं गाँव का सबसे बहादुर आदमी हूँ। मिर्च मुझे डरा नहीं सकती!”
पन्ना 2
अर्जुन बगीचे से एक छोटी हरी मिर्च लाकर उन्हें देता है।
पन्ना 3
दादाजी उसे एक ही बार में खा जाते हैं। कुरकुर! वे मुस्कुराते हैं। “देखा? कुछ नहीं हुआ!”
पन्ना 4
फिर उनके कान लाल हो जाते हैं। नाक लाल हो जाती है। चेहरा टमाटर जैसा लाल हो जाता है!
पन्ना 5
“पानी! पानी!” दादाजी आँगन में गोल-गोल भागते हैं। मुर्गियाँ भी भागती हैं।
पन्ना 6
अर्जुन एक कटोरी दही लाता है। दादाजी सारा खा जाते हैं। “शायद मिर्च मुझसे ज़्यादा बहादुर है,” वे कहते हैं।