पन्ना 1
अर्जुन के पास आम का एक पेड़ है। उस पर एक भी आम नहीं है। “प्लीज़, आम उगाओ ना!” अर्जुन कहता है।
पन्ना 2
अर्जुन रोज़ पेड़ को पानी देता है। छोटे-छोटे हरे आम आ जाते हैं।
पन्ना 3
गर्मी आती है। आम बड़े और पीले हो जाते हैं। धप्प! एक आम गिरता है।
पन्ना 4
धप्प! धप्प! धप्प! अब हर जगह आम हैं: चारपाई पर, बाल्टी में, पापा की चप्पल में!
पन्ना 5
अर्जुन खाता ही जाता है। आम का रस बहकर कोहनियों तक पहुँच जाता है।
पन्ना 6
तो अर्जुन गली के हर घर में आम बाँटता है। अब पूरी गली से आम की ख़ुशबू आती है।