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अर्जुन हम्पी घूमने जाता है। हर तरफ़ बड़े-बड़े गोल पत्थर हैं, जैसे बड़े-बड़े कंचे!
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वहाँ पत्थर का बना एक रथ है। उसके पहिए भी पत्थर के हैं!
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“क्या यह चलता है?” अर्जुन पूछता है। गाइड मुस्कुराते हैं। “बस कहानियों में।”
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एक बड़े हॉल में गाइड पत्थर के खंभे को थपथपाते हैं। वह घंटी जैसा बजता है। टन्न!
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अर्जुन दूसरे खंभे को थपथपाता है। उसकी आवाज़ अलग है। टिन्न!
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सूरज ढलते समय पत्थर नारंगी और सुनहरे हो जाते हैं। अर्जुन घर ले जाने के लिए पत्थर के रथ की तस्वीर बनाता है।