पन्ना 1
एक रात, एक बड़ी कछुआ माँ समुद्र से निकलकर ओडिशा के एक किनारे पर आती है।
पन्ना 2
वह रेत में गड्ढा खोदती है और गोल-गोल सफ़ेद अंडे देती है। फिर वह वापस समुद्र में चली जाती है।
पन्ना 3
अर्जुन और दादाजी दूर से देखते हैं। वे किनारे को साफ़ और शांत रखते हैं।
पन्ना 4
कई दिन बाद रेत हिलने लगती है। नन्हे-नन्हे कछुए बाहर निकल आते हैं!
पन्ना 5
छोटे कछुए समुद्र की ओर चलते हैं। टुक-टुक, टुक-टुक।
पन्ना 6
एक लहर उन्हें बहा ले जाती है। “एक दिन वापस आना!” अर्जुन कहता है।