चतुर खरगोश और शेर
एक जंगल में भासुरक नाम का एक खूँखार शेर राज करता था। वह रोज़ बहुत सारे जानवरों का शिकार करता था — जितने वह खा भी नहीं सकता था।
डरे हुए जानवरों ने मिलकर उससे एक सौदा किया। “महाराज, आप अपनी गुफा में ही रहिए,” उन्होंने कहा। “हम में से एक जानवर रोज़ खुद आपके पास आ जाएगा।” शेर मान गया।
एक दिन एक छोटे-से खरगोश की बारी आई। वह डरा हुआ तो था, पर बहुत चतुर भी था। वह धीरे-धीरे चला और शेर के पास बहुत देर से पहुँचा।
“इतनी देर क्यों लगाई?” भूखा शेर दहाड़ा।
“माफ़ कीजिए, महाराज,” खरगोश बोला। “रास्ते में मुझे एक और शेर ने रोक लिया। वह कहता है कि इस जंगल का असली राजा वही है!”
“दूसरा राजा?” शेर गुर्राया। “मुझे अभी उसके पास ले चलो!”
खरगोश उसे एक गहरे कुएँ के पास ले गया। “वह इसी के अंदर रहता है,” उसने धीरे से कहा। शेर ने झाँककर देखा तो पानी में उसे अपना ही गुस्से भरा चेहरा दिखा। वह दहाड़ा, तो कुएँ से भी दहाड़ लौटकर आई।
शेर उस दूसरे शेर से लड़ने के लिए कुएँ में कूद पड़ा — और फिर कभी बाहर नहीं निकला। खरगोश दौड़कर घर लौट आया, और जंगल के सारे जानवर चैन से रहने लगे।