हाथी और चूहे
बहुत समय पहले, एक झील के किनारे एक पुराने उजड़े गाँव के खंडहरों में बहुत सारे चूहे रहते थे।
एक दिन हाथियों का एक झुंड पानी पीने जाते हुए उस गाँव से गुज़रा। उनके बड़े-बड़े पैरों तले चूहों के कई घर कुचल गए।
चूहों का राजा हिम्मत करके हाथियों के राजा के पास गया। “कृपया कोई दूसरा रास्ता ले लीजिए,” उसने कहा। “एक दिन हम भी आपकी मदद करेंगे।” नन्हे चूहे हाथियों की मदद करेंगे — यह सोचकर हाथियों का राजा मुस्कुराया, पर उसने प्यार से बात मान ली।
कुछ समय बाद जंगल में शिकारी आए। उन्होंने हाथियों को रस्सी के मज़बूत जालों में फँसा लिया। हाथियों ने खूब खींचा, खूब ज़ोर लगाया, पर वे छूट नहीं पाए।
तब हाथियों के राजा को चूहों की याद आई। उसने एक हाथी को, जो जाल से बच निकला था, मदद माँगने भेजा।
सैकड़ों चूहे दौड़े चले आए। वे रात भर रस्सियों को कुतरते रहे, जब तक हर जाल टुकड़े-टुकड़े न हो गया।
हाथी आज़ाद हो गए! “धन्यवाद, नन्हे दोस्तो,” हाथियों का राजा बोला। “तुम छोटे हो, पर तुम्हारा दिल बहुत बड़ा है।”