पन्ना 1
होली है! अर्जुन के पास गुलाबी रंग की थैली है। पापा के पास हरा। दादी के पास पीला!
पन्ना 2
छप! पापा पर गुलाबी। छप! अर्जुन पर हरा। कुत्ता भी बैंगनी हो गया!
पन्ना 3
रात में सब नहाते हैं। पर अर्जुन का एक कान अब भी गुलाबी है। सब हँसते हैं।
पन्ना 4
शाम को मिठाइयाँ हैं। गुझिया! अर्जुन तीन खा लेता है।
पन्ना 5
कुत्ता अब भी बैंगनी है। उसे फ़र्क नहीं पड़ता। वह भी एक गुझिया खाता है।
पन्ना 6
अगले साल अर्जुन को नीला चाहिए। पापा कहते हैं, “तो मुझे नारंगी!”