पन्ना 1
अर्जुन उज्जैन में रहता है। रात में वह छत पर चढ़कर तारे देखता है।
पन्ना 2
एक बूढ़े बाबा अर्जुन को एक लंबी नली देते हैं। चाँद कितना बड़ा दिखता है!
पन्ना 3
अर्जुन तारे गिनता है। एक, दो, तीन... सौ! अर्जुन उज्जैन का तारे गिनने वाला है।
पन्ना 4
एक तारा हिल रहा है! “वह तारा नहीं,” बाबा कहते हैं। “वह ग्रह है।”
पन्ना 5
अर्जुन स्लेट पर आसमान बनाता है। तारों के लिए बिंदु। चाँद के लिए गोला।
पन्ना 6
अब हर रात अर्जुन एक और तारा बनाता है। स्लेट लगभग भर गई!