पन्ना 1
कच्छ का रण नमक जैसा सफ़ेद है। वह नमक ही है! अर्जुन पूनम की रात वहाँ आता है।
पन्ना 2
ढम, ढम! एक ढोली बजाता है। नाचने वाले घूमते हैं। उनके शीशे चाँदनी में चमकते हैं।
पन्ना 3
“अब तुम्हारी बारी!” ढोली कहता है। अर्जुन बजाता है। ढम! आवाज़ सफ़ेद रेगिस्तान में दूर तक जाती है।
पन्ना 4
चाँद बादल के पीछे चला जाता है। रेगिस्तान चाँदी जैसा, फिर अँधेरा हो जाता है।
पन्ना 5
अर्जुन एक गोल मिट्टी के घर में सोता है। ढोल अब भी कानों में है। ढम, ढम।
पन्ना 6
सुबह नमक चमकता है। अर्जुन एक सफ़ेद पत्थर घर ले जाता है।