पन्ना 1
काशी में नदी के पास एक बड़ा बरगद है। अर्जुन को उसकी लंबी जड़ें पसंद हैं। वे रस्सी जैसी लटकती हैं।
पन्ना 2
गर्मी है। पेड़ प्यासा है। अर्जुन रोज़ एक छोटा घड़ा पानी लाता है।
पन्ना 3
फिर बारिश आती है! पेड़ फिर हरा हो जाता है। “तुमने मदद की,” दादी कहती हैं। अर्जुन मुस्कुराता है।
पन्ना 4
पेड़ पर चिड़ियाँ लौट आती हैं। तोते! गिलहरियाँ! एक नींद वाला उल्लू।
पन्ना 5
अर्जुन सबसे बड़ी जड़ पर झूला बाँधता है। झूऽऽ! ऊपर-नीचे।
पन्ना 6
अब पूरा गाँव छाँव में बैठता है। बरगद सबका दोस्त है।