पन्ना 1
दिवाली की रात है। अर्जुन एक छोटा दीया पीला रंगता है। अर्जुन उसे दरवाज़े पर रखता है।
पन्ना 2
सन्न! तेज़ हवा चलती है। बड़े दीये बुझ जाते हैं। पर छोटा दीया जलता रहता है।
पन्ना 3
पापा उसी रोशनी से घर आते हैं। “छोटा दीया काफ़ी है,” पापा कहते हैं। अर्जुन खुश है।
पन्ना 4
सुबह दीया अब भी गरम है। अर्जुन उसे कपड़े से साफ़ करता है।
पन्ना 5
दादी कहती हैं, “इसे रख लो। अगले साल यह फिर चमकेगा।”
पन्ना 6
अर्जुन दीये को अलमारी में रखता है। छोटा दीया, बड़ी कहानी।