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केरल में नदी धीमी और हरी है। अर्जुन एक छोटी नाव में बैठा है। चप्पू बहुत बड़ा है!
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एक सफ़ेद चिड़िया एक पैर पर खड़ी है। शश! अर्जुन धीरे से चप्पू चलाता है। चिड़िया हिलती नहीं।
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सूरज डूब जाता है। नाव घर आती है। अर्जुन कहता है, “नदी तो सड़क है!”
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अगले दिन अर्जुन फिर नाव पर जाता है। एक मछली उछलती है। छप!
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किनारे पर एक लड़का हाथ हिलाता है। अर्जुन बड़े चप्पू से हाथ हिलाता है। अरे, छपाक!
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अब अर्जुन अकेले नाव चला सकता है। धीरे और शांत, नदी की तरह।