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छुक छुक! एक छोटी नीली रेल पहाड़ चढ़ती है। अर्जुन खिड़की के पास बैठा है।
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रेल गोल-गोल घूमती है। ऊपर बादलों में! नीचे चाय के बाग़ हरे हैं।
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ऊपर ठंड है। अर्जुन गरम चाय पीता है। “रेल छोटी है, पर पहाड़ बड़े हैं!”
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रेल की छत पर एक बंदर बैठा है! उसे अर्जुन का बिस्कुट चाहिए।
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अर्जुन उसे आधा देता है। बंदर अगले मोड़ पर कूद जाता है।
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नीचे जाते हुए रेल तेज़ है। छुक छुक! अँधेरे से पहले घर।