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गंगा नदी चौड़ी और भूरी है। अर्जुन नाव में बैठा है। छपाक! कुछ कूदता है।
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यह नदी की डॉल्फ़िन है! उसकी नाक लंबी है। वह ठीक से देख नहीं सकती, पर सुन सकती है।
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अर्जुन नाव को थपथपाता है। ठक, ठक। डॉल्फ़िन पास आती है। “नमस्ते, दोस्त!” अर्जुन कहता है।
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डॉल्फ़िन नाव के साथ तैरती है। ऊपर, नीचे, ऊपर, नीचे।
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एक नन्ही डॉल्फ़िन भी आती है! वह छोटी और गुलाबी है।
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किनारे पर अर्जुन अलविदा कहते हुए हाथ हिलाता है। नदी उनका राज़ रखती है।