पन्ना 1
कुम्हार चाक घुमाता है। गोल-गोल। अर्जुन गीली मिट्टी पर हाथ रखता है।
पन्ना 2
अरे! घड़ा टेढ़ा हो जाता है। वह बैठ जाता है। अर्जुन फिर कोशिश करता है। और फिर।
पन्ना 3
तीसरा घड़ा अच्छा बना! वह आग में जाता है। अब वह सख़्त और लाल है। अर्जुन ने घड़ा बनाया!
पन्ना 4
अर्जुन घड़े को रंगता है। नीली मछली। हरा पत्ता। पीला सूरज।
पन्ना 5
अम्मा उसमें पानी भरती हैं। पानी दिन भर ठंडा रहता है!
पन्ना 6
“मेरा पहला घड़ा,” अर्जुन कहता है। कुम्हार कहता है, “आख़िरी नहीं।”